*भगवान को प्रसाद कैसे चढायें ? 'अग्नि देवानां मुखम् ।' सब देवताओं का मुख अग्नि है । अग्नि देवता समर्पित वस्तु यानी औषधियुक्त सामग्री को सूक्ष्मीकृत कर वायु देवता को सौंप देता है, वायु देवता उसे जल देवता को सौंप देता है, जल देवता वर्षा करके उसे पृथ्वी को सौंप देता है, इस तरह थोडी वस्तु हजारों गुना बढ कर हजारों मनुष्यों तक पहुँच जाती है और हजारों वनस्पतियों को पुष्ट करती है । यही है असली भगवान को प्रसाद चढाना, यही है असली देव पूजा, संगतिकरण व दान । इसीलिए यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा गया है। हर दिन यज्ञ करें, जन्मदिवस पर यज्ञ करें, त्योहारों पर बडे बडे यज्ञ करें- यही है त्योहार मनाने की असली विधि । त्योहारों पर पशुवध और पटाखों आदि द्वारा जलवायु को दूषित करना जघन्य अपराध है। स्मरण रहे- भगवान की मूर्तियां बन ही नहीं सकती और मूर्तियों पर चढाया प्रसाद चूहे खा जाते हैं या पुजारी खा जाते हैं। जितना समय व धन लोग बेकार के कार्यों में लगाते हैं उतना समय व धन यदि यज्ञादि शुभ कर्मों में लगायें तो अपना व राष्ट्र का कल्याण हो जाय।